अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो का कहना है कि अमरीका ने उत्तर सीरिया में तुर्की के हमले को हरी झंडी नहीं दी थी.
पॉम्पियो ने उत्तर-पूर्वी सीरिया से अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाने के फ़ैसले का भी बचाव किया. ट्रंप के इस फ़ैसले की अमरीका के भीतर और बाक़ी दुनिया में तीखी आलोचना हो रही है.
तुर्की ने उत्तर-पूर्वी सीरिया में कुर्द लड़ाकों के क़ब्ज़े वाले इलाकों में हवाई हमले करना शुरू कर दिया है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन का कहना है कि इन हवाई हमलों का मक़सद सीमा पर 'टेरर कॉरिडोर को बनने से रोकना' है.
तुर्की सुरक्षाबल एक ऐसा 'सेफ़ ज़ोन' बनाने की कोशिश कर रहे हैं जहां कुर्द सैनिक न हों. तुर्की का कहना है कि इस 'सेफ़ ज़ोन' में सीरियाई शरणार्थियों के घर भी होंगे.
कुर्दों के नेतृत्व वाले सुरक्षाबलों ने तुर्की के हमलों का जवाब दिया है और दोनों पक्षों के सैनिकों में संघर्ष हुआ है.
कुर्दों ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट को हराने में मदद की थी और वे आईएस के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका के अहम सहयोगी थे.
मौजूदा समय में कुर्द अपने क़ाबू वाले इलाक़ों की जेलों में बंद हज़ारों आईएस लड़ाकों और शिविरों में रह रहे उनके रिश्तेदारों की सुरक्षा करते हैं.
अभी यह साफ़ नहीं है कि युद्ध शुरू होने की स्थिति में वो ऐसा करते रहेंगे या नहीं.
अमरीकी सेना का कहना है कि उसने उन दो ब्रिटिश नागरिकों को हिरासत में ले लिया है जो आइएस की एक सेल में अपनी बर्बर भूमिका के लिए कुख्यात हैं.
इस सेल ने पश्चिमी देशों के क़रीब 30 नागरिकों को बंधक बनाकर उनका उत्पीड़न और हत्या की थी.
इन ब्रितानी नागरिकों के नाम अल शफ़ी अल शेख़ और अलेक्ज़ेंडा कोटी है. ये दोनों आईएस की ब्रितानी सेल के सदस्य थे जिसका छद्म नाम 'द बीटल्स' था.
इन दोनों को अब उत्तरी सीरिया में कुर्द समर्थित सेना के क़ब्ज़े वाली एक जेल से छुड़ा लिया गया है.
अमरीकी ब्रॉडकास्टर पीबीएस को दिए एक इंटरव्यू में माइक पॉम्पियो ने अमरीकी राष्ट्रपति के चौंकाने वाले फ़ैसले का बचाव किया.
पॉम्पियो ने ये भी कहा कि तुर्की को 'सुरक्षा की वास्तविक चिंता' है और वो 'अपने दक्षिण में आतंकी ख़तरे से जूझ रहा है.'
पॉम्पियो ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को 'पूरी तरह ग़लत' बताया जिनमें कहा जा रहा है कि अमरीका ने तुर्की को उत्तर-पूर्वी सीरिया में हमले की इजाज़त दी.
अब अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो तुर्की के इस 'हमले का समर्थन नहीं करता' है. ट्रंप ने तुर्की के इस क़दम को 'बुरा फ़ैसला' भी बताया है.
इससे पहले के अपने एक बयान में अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा था कि अगर तुर्की ने अपनी हदें पार कीं तो वो उसकी अर्थव्यवस्था को 'तबाह' कर देंगे.
बाद में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ट्रंप ने कहा कि तुर्क और कुर्द 'सदियों से एक-दूसरे के लिए लड़ते आए हैं.' ट्रंप ने कहा, "कुर्द लड़ाकों ने दूसरे विश्व युद्ध में हमारी मदद नहीं की."
ये सब कुछ कहने के बाद ट्रंप ने एक बात और जोड़ी, "जो भी चीज़ें मैंने बताई, उनके बावजूद हम कुर्दों को पसंद करते हैं."
उत्तरी-पूर्वी सीरिया से अमरीकी सैनिकों को हटाने का डोनल्ड ट्रंप का फ़ैसला अचानक ही आया था.
ट्रंप के इस फ़ैसले की उनकी अपनी पार्टी रिपब्लिकन और विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी दोनों से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.
यहां डोनल्ड ट्रंप के कट्टर समर्थक माने जाने वाले सीनेटर लिंज़ी ग्राहम ने भी ट्रंप के इस फ़ैसले की निंदा की है. उन्होंने कहा, "अमरीका ने अपने सहयोगी को बेशर्मी से छोड़ दिया."
ग्राहम ने कहा, "प्रशासन ने तुर्की के ख़िलाफ़ कोई भी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है. ऐसे में मैं दोनों पार्टियों से मज़बूत समर्थन की उम्मीद करता हूं."
पॉम्पियो ने उत्तर-पूर्वी सीरिया से अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाने के फ़ैसले का भी बचाव किया. ट्रंप के इस फ़ैसले की अमरीका के भीतर और बाक़ी दुनिया में तीखी आलोचना हो रही है.
तुर्की ने उत्तर-पूर्वी सीरिया में कुर्द लड़ाकों के क़ब्ज़े वाले इलाकों में हवाई हमले करना शुरू कर दिया है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन का कहना है कि इन हवाई हमलों का मक़सद सीमा पर 'टेरर कॉरिडोर को बनने से रोकना' है.
तुर्की सुरक्षाबल एक ऐसा 'सेफ़ ज़ोन' बनाने की कोशिश कर रहे हैं जहां कुर्द सैनिक न हों. तुर्की का कहना है कि इस 'सेफ़ ज़ोन' में सीरियाई शरणार्थियों के घर भी होंगे.
कुर्दों के नेतृत्व वाले सुरक्षाबलों ने तुर्की के हमलों का जवाब दिया है और दोनों पक्षों के सैनिकों में संघर्ष हुआ है.
कुर्दों ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट को हराने में मदद की थी और वे आईएस के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका के अहम सहयोगी थे.
मौजूदा समय में कुर्द अपने क़ाबू वाले इलाक़ों की जेलों में बंद हज़ारों आईएस लड़ाकों और शिविरों में रह रहे उनके रिश्तेदारों की सुरक्षा करते हैं.
अभी यह साफ़ नहीं है कि युद्ध शुरू होने की स्थिति में वो ऐसा करते रहेंगे या नहीं.
अमरीकी सेना का कहना है कि उसने उन दो ब्रिटिश नागरिकों को हिरासत में ले लिया है जो आइएस की एक सेल में अपनी बर्बर भूमिका के लिए कुख्यात हैं.
इस सेल ने पश्चिमी देशों के क़रीब 30 नागरिकों को बंधक बनाकर उनका उत्पीड़न और हत्या की थी.
इन ब्रितानी नागरिकों के नाम अल शफ़ी अल शेख़ और अलेक्ज़ेंडा कोटी है. ये दोनों आईएस की ब्रितानी सेल के सदस्य थे जिसका छद्म नाम 'द बीटल्स' था.
इन दोनों को अब उत्तरी सीरिया में कुर्द समर्थित सेना के क़ब्ज़े वाली एक जेल से छुड़ा लिया गया है.
अमरीकी ब्रॉडकास्टर पीबीएस को दिए एक इंटरव्यू में माइक पॉम्पियो ने अमरीकी राष्ट्रपति के चौंकाने वाले फ़ैसले का बचाव किया.
पॉम्पियो ने ये भी कहा कि तुर्की को 'सुरक्षा की वास्तविक चिंता' है और वो 'अपने दक्षिण में आतंकी ख़तरे से जूझ रहा है.'
पॉम्पियो ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को 'पूरी तरह ग़लत' बताया जिनमें कहा जा रहा है कि अमरीका ने तुर्की को उत्तर-पूर्वी सीरिया में हमले की इजाज़त दी.
अब अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो तुर्की के इस 'हमले का समर्थन नहीं करता' है. ट्रंप ने तुर्की के इस क़दम को 'बुरा फ़ैसला' भी बताया है.
इससे पहले के अपने एक बयान में अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा था कि अगर तुर्की ने अपनी हदें पार कीं तो वो उसकी अर्थव्यवस्था को 'तबाह' कर देंगे.
बाद में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ट्रंप ने कहा कि तुर्क और कुर्द 'सदियों से एक-दूसरे के लिए लड़ते आए हैं.' ट्रंप ने कहा, "कुर्द लड़ाकों ने दूसरे विश्व युद्ध में हमारी मदद नहीं की."
ये सब कुछ कहने के बाद ट्रंप ने एक बात और जोड़ी, "जो भी चीज़ें मैंने बताई, उनके बावजूद हम कुर्दों को पसंद करते हैं."
उत्तरी-पूर्वी सीरिया से अमरीकी सैनिकों को हटाने का डोनल्ड ट्रंप का फ़ैसला अचानक ही आया था.
ट्रंप के इस फ़ैसले की उनकी अपनी पार्टी रिपब्लिकन और विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी दोनों से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.
यहां डोनल्ड ट्रंप के कट्टर समर्थक माने जाने वाले सीनेटर लिंज़ी ग्राहम ने भी ट्रंप के इस फ़ैसले की निंदा की है. उन्होंने कहा, "अमरीका ने अपने सहयोगी को बेशर्मी से छोड़ दिया."
ग्राहम ने कहा, "प्रशासन ने तुर्की के ख़िलाफ़ कोई भी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है. ऐसे में मैं दोनों पार्टियों से मज़बूत समर्थन की उम्मीद करता हूं."
Comments
Post a Comment