आस्था के संगम कुंभ में लाखों की संख्या में लोग जमा होते हैं, ऐसे में वहां बच्चों के लापता होने की आशंका हमेशा बनी रहती है. तकनीक के विकसित होने से पहले ऐसे बच्चों की संख्या काफी ज्यादा होती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका हल निकाल लिया गया है. इस बार प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान अपने अभिभावकों से बिछड़ने वाले बच्चों का पता लगाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस 14 साल से कम उम्र के बच्चों को रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान पत्र (RF ID) मुहैया कराएगी.
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने सोमवार को एजेंसी भाषा को बताया कि कुंभ मेला 50 दिन चलेगा और इसमें 12 करोड़ से अधिक लोग शामिल होंगे. बच्चे लापता ना होने पाएं, इसके लिए 14 साल से कम आयु के बच्चों को आरएफ आईडी दी जाएगी. उन्होंने बताया कि वोडाफोन से सहयोग लिया गया है और वह समन्वय को राजी है. इसके लिए चालीस हजार आरएफ आईडी बनेंगी जिसका इस्तेमाल कुंभ के दौरान लापता होने वाले बच्चों को खोजने में किया जाएगा.
आरएफ आईडी एक किस्म का वायरलेस संचार माध्यम है. इसमें इलेक्ट्रो मैग्नेटिक या इलेक्ट्रोस्टैटिक कफलिंग का इस्तेमाल होता है. यह किसी व्यक्ति या वस्तु की पहचान में सहायक होता है. डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि कुंभ मेले में 15 आधुनिक एकीकृत डिजिटल खोया-पाया केन्द्र बनाए गए हैं.
सार्वजनिक घोषणा प्रणाली के अलावा एलईडी के जरिए सूचना के डिस्प्ले की व्यवस्था की गई है. डीजीपी ने बताया कि पहली बार ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा. यह वाहनों की पहचान उनके रंग, लाइसेंस प्लेट, तारीख और वक्त से करने में सक्षम होगी.
बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के खिलाफ मैदान में उतारा था. अमेठी संसदीय सीट पर राहुल गांधी को करीब चार लाख और बीजेपी की स्मृति ईरानी को करीब तीन लाख वोट मिले थे. जबकि सपा ने कांग्रेस के समर्थन में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था. इसके बावजूद राहुल करीब 1 लाख वोट से ही जीत सके थे. इसके अलावा 2017 के विधानसभा चुनाव अमेठी में कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका था. जबकि बीजेपी ने पांच विधानसभा सीटों में से चार पर जीत हासिल की थी और एक सीट सपा की झोली में गई थी.
वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने रायबरेली से सोनिया गांधी के सामने अजय अग्रवाल को मैदान में उतारा था. मोदी लहर के बावजूद वो सोनिया के सामने कड़ी चुनौती पेश नहीं कर सके थे. लेकिन बीजेपी को करीब पौने दो लाख वोट मिले थे. इसके बाद जब 2017 में विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को 2, कांग्रेस को 2 और एक सीट पर सपा को जीत मिली थी.
हालांकि कांग्रेस के एमएलसी दिनेश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह ने पार्टी को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. इसके अलावा हरचंद्रपुर से कांग्रेस विधायक राकेश सिंह भले ही बीजेपी ज्वॉइन नहीं किया हो, लेकिन वो कांग्रेस के साथ भी नहीं खड़े दिख रहे हैं.
बीजेपी ने 2019 में रायबरेली और अमेठी की घेराबंदी करने का प्लान बना रखा है. बीजेपी नेता स्मृति ईरानी पिछले पांच साल से अमेठी में सक्रिय हैं. वो लगातार अमेठी का दौरा कर रही हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर कांग्रेस आलाकमान को घेरती रहती हैं. इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने सोनिया गांधी की संसदीय सीट से एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह को अपने साथ मिला लिया है. इन दिनों दिनेश सिंह कांग्रेस नेतृत्व को घेरने का काम कर रहे हैं.
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने सोमवार को एजेंसी भाषा को बताया कि कुंभ मेला 50 दिन चलेगा और इसमें 12 करोड़ से अधिक लोग शामिल होंगे. बच्चे लापता ना होने पाएं, इसके लिए 14 साल से कम आयु के बच्चों को आरएफ आईडी दी जाएगी. उन्होंने बताया कि वोडाफोन से सहयोग लिया गया है और वह समन्वय को राजी है. इसके लिए चालीस हजार आरएफ आईडी बनेंगी जिसका इस्तेमाल कुंभ के दौरान लापता होने वाले बच्चों को खोजने में किया जाएगा.
आरएफ आईडी एक किस्म का वायरलेस संचार माध्यम है. इसमें इलेक्ट्रो मैग्नेटिक या इलेक्ट्रोस्टैटिक कफलिंग का इस्तेमाल होता है. यह किसी व्यक्ति या वस्तु की पहचान में सहायक होता है. डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि कुंभ मेले में 15 आधुनिक एकीकृत डिजिटल खोया-पाया केन्द्र बनाए गए हैं.
सार्वजनिक घोषणा प्रणाली के अलावा एलईडी के जरिए सूचना के डिस्प्ले की व्यवस्था की गई है. डीजीपी ने बताया कि पहली बार ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा. यह वाहनों की पहचान उनके रंग, लाइसेंस प्लेट, तारीख और वक्त से करने में सक्षम होगी.
बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के खिलाफ मैदान में उतारा था. अमेठी संसदीय सीट पर राहुल गांधी को करीब चार लाख और बीजेपी की स्मृति ईरानी को करीब तीन लाख वोट मिले थे. जबकि सपा ने कांग्रेस के समर्थन में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था. इसके बावजूद राहुल करीब 1 लाख वोट से ही जीत सके थे. इसके अलावा 2017 के विधानसभा चुनाव अमेठी में कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका था. जबकि बीजेपी ने पांच विधानसभा सीटों में से चार पर जीत हासिल की थी और एक सीट सपा की झोली में गई थी.
वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने रायबरेली से सोनिया गांधी के सामने अजय अग्रवाल को मैदान में उतारा था. मोदी लहर के बावजूद वो सोनिया के सामने कड़ी चुनौती पेश नहीं कर सके थे. लेकिन बीजेपी को करीब पौने दो लाख वोट मिले थे. इसके बाद जब 2017 में विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को 2, कांग्रेस को 2 और एक सीट पर सपा को जीत मिली थी.
हालांकि कांग्रेस के एमएलसी दिनेश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह ने पार्टी को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. इसके अलावा हरचंद्रपुर से कांग्रेस विधायक राकेश सिंह भले ही बीजेपी ज्वॉइन नहीं किया हो, लेकिन वो कांग्रेस के साथ भी नहीं खड़े दिख रहे हैं.
बीजेपी ने 2019 में रायबरेली और अमेठी की घेराबंदी करने का प्लान बना रखा है. बीजेपी नेता स्मृति ईरानी पिछले पांच साल से अमेठी में सक्रिय हैं. वो लगातार अमेठी का दौरा कर रही हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर कांग्रेस आलाकमान को घेरती रहती हैं. इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने सोनिया गांधी की संसदीय सीट से एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह को अपने साथ मिला लिया है. इन दिनों दिनेश सिंह कांग्रेस नेतृत्व को घेरने का काम कर रहे हैं.
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